कुरान के सूरह अज़-ज़लज़लाह की पहली तीन आयतें, जिसमें कुल आठ आयतें हैं, पृथ्वी के अत्यधिक शक्तिशाली कंपन का वर्णन करती हैं। यह कंपन इतना तीव्र है कि पृथ्वी अपने भीतर दबी हुई हर चीज को बाहर निकाल देगी। इन आयतों में आगामी कयामत की एक भयावह तस्वीर प्रस्तुत की गई है, जब पृथ्वी कांप उठेगी और सब कुछ उथल-पुथल हो जाएगा। यह विवरण प्रकृति की शक्ति और अल्लाह की चेतावनी का प्रतीक है। सूरह अज़-ज़लज़लाह उन लोगों के लिए एक अनुस्मारक है जो आगामी जीवन में विश्वास नहीं रखते हैं। इस व्याख्या का उद्देश्य कुरान के संदेश को समझना और पृथ्वी के कंपन की गंभीरता को महसूस करना है।