अर्थशास्त्री पत्रिका ने हाल ही में राष्ट्रपति चुनावों में वेस्टकोल नामक एक प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विभिन्न राजनीतिक रुझानों वाले नेता युवा मतदाताओं तक पहुँचने के लिए वैकल्पिक माध्यमों, जैसे सोशल मीडिया, का उपयोग कर रहे हैं। वेस्टकोल जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों के माध्यम से, राजनेता सीधे तौर पर युवाओं से जुड़ने और उन्हें प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह विश्लेषण दर्शाता है कि पारंपरिक प्रचार विधियों के साथ-साथ, सोशल मीडिया भी चुनावी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पत्रिका ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे ये प्रभावशाली व्यक्ति मतदाताओं की राय को आकार देने में सक्षम हैं। यह प्रवृत्ति राजनीतिक संचार के बदलते स्वरूप को दर्शाती है और भविष्य के चुनावों पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल खड़े करती है। इस विश्लेषण से पता चलता है कि राजनीतिक दलों को अब सोशल मीडिया रणनीति पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।