सामाजिक मामलों के मंत्रालय ने सामाजिक सहायता प्राप्तकर्ताओं को 'रेड-व्हाइट' सहकारी समितियों का सदस्य बनने के लिए प्रोत्साहित किया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन लाभार्थियों को केवल सहायता पर निर्भर रहने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ना है। इस पहल के माध्यम से लोग अपने स्वयं के छोटे व्यवसाय शुरू कर सकेंगे और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होंगे। सहकारी समितियों के माध्यम से उन्हें आवश्यक संसाधन और व्यावसायिक मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि सामूहिक उद्यमशीलता से गरीबी कम करने में मदद मिलेगी। यह कदम सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण में बदलने की एक कोशिश है। इस प्रकार, सहायता प्राप्तकर्ता भविष्य में स्वयं उद्यमी बनकर समाज के विकास में योगदान देंगे।

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