इंडोनेशियाई इस्लामिक विद्वानों की परिषद (MUI) ने 2014 में एक फतवा जारी किया, जिसमें समलैंगिकता, गे संबंध, संभोग और यौन दुराचार से संबंधित इस्लामिक कानूनी प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है। यह फतवा विवाह के बाहर होने वाली विभिन्न यौन गतिविधियों पर इस्लामिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। MUI का यह फैसला इंडोनेशिया में इस्लामिक कानून के दायरे में इन गतिविधियों की कानूनी स्थिति को परिभाषित करने का प्रयास करता है। फतवा का उद्देश्य इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार मार्गदर्शन प्रदान करना है। यह दस्तावेज़ इंडोनेशियाई समाज में नैतिक और धार्मिक बहस का हिस्सा है। फतवा में इन कृत्यों को इस्लामिक कानून के अनुसार निषिद्ध माना गया है। यह निर्णय इंडोनेशिया में धार्मिक और सामाजिक मानदंडों को प्रभावित करता है।