इंडोनेशिया में अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर एक दिलचस्प प्रवृत्ति देखी गई है। रुपये के मूल्य में मामूली गिरावट आने पर भी कुछ लोग इसे राष्ट्रीय संकट के रूप में देखने लगते हैं। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव को भी अक्सर अतिरंजित कर प्रस्तुत किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिक्रिया इंडोनेशियाई जनता के बीच आर्थिक असुरक्षा की भावना को दर्शाती है। यह भी संभव है कि मीडिया कवरेज इस धारणा को मजबूत करने में भूमिका निभा रहा हो। सरकार ने अर्थव्यवस्था की स्थिति को स्थिर बताने की कोशिश की है, लेकिन जनता का विश्वास अभी भी डगमगा रहा है। इस स्थिति के कारण नीति निर्माताओं के लिए सटीक आकलन और प्रभावी प्रतिक्रिया देना मुश्किल हो सकता है।
