इंडोनेशियाई इस्लामिक विद्वानों की परिषद (MUI) ने समलैंगिक पार्टियों में शामिल लोगों के पुनर्वास या मार्गदर्शन के विचार को खारिज कर दिया है। MUI के उपाध्यक्ष, KH Cholil ने जोर देकर कहा कि ऐसे कृत्यों के लिए आपराधिक दंड आवश्यक है। परिषद का मानना है कि केवल पुनर्वास पर्याप्त नहीं है और इस तरह के व्यवहार को रोकने के लिए मजबूत निवारक उपायों की आवश्यकता है। यह बयान समलैंगिक गतिविधियों के प्रति कानूनी दृष्टिकोण पर चल रही बहस के बीच आया है। MUI का रुख इंडोनेशिया में रूढ़िवादी मूल्यों को दर्शाता है, जहां समलैंगिकता व्यापक रूप से स्वीकार नहीं है। परिषद ने स्पष्ट किया कि यह समलैंगिक व्यक्तियों के प्रति भेदभाव का समर्थन नहीं करती है, लेकिन समलैंगिक कृत्यों को कानूनी रूप से दंडनीय मानना आवश्यक है। इस मुद्दे पर आगे चर्चा और कानूनी कार्रवाई की उम्मीद है।
