राष्ट्रपति प्रभावो सुबियांतो ने घोषणा की है कि पहली कक्षा से ही छात्रों को विदेशी भाषा सीखना अनिवार्य किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों की दक्षता में वृद्धि करना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है। शुरुआती भाषाओं में मंदारिन और रूसी जैसी भाषाएँ शामिल हो सकती हैं। राष्ट्रपति का मानना है कि यह कदम इंडोनेशिया के नागरिकों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। सरकार इस योजना को लागू करने के लिए पाठ्यक्रम और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह निर्णय इंडोनेशिया के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य छात्रों को युवावस्था में ही बहुभाषी बनाना है।