भ्रष्टाचार निवारण आयोग (केपीके) ने देश में वित्तीय भ्रष्टाचार की बढ़ती प्रणालीगत प्रकृति पर चिंता व्यक्त की है। आयोग का कहना है कि भ्रष्टाचार अब योजना या बजट आवंटन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही हो जाता है। यह खुलासा भ्रष्टाचार के नए और अधिक सूक्ष्म तरीकों की ओर इशारा करता है। केपीके के अनुसार, यह स्थिति वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का परिणाम है। आयोग इस समस्या से निपटने के लिए अधिक प्रभावी उपाय तलाश रहा है। यह मामला मुआरा एनिम जिले से जुड़ा है, जहाँ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच चल रही है। केपीके का यह बयान सरकारी धन के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।