जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए COP17 सम्मेलन में स्वदेशी समुदायों और नागरिक समाज संगठनों को शामिल नहीं किए जाने के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे भूमि के वास्तविक मालिक हैं और उनकी भागीदारी के बिना किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं किया जा सकता है। वे COP17 में लिए गए सभी निर्णयों में स्वदेशी समुदायों की भागीदारी को शामिल करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लैंगिक समानता, स्वदेशी अधिकार, स्थानीय समुदाय, जलवायु परिवर्तन और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर उन्हें दरकिनार कर दिया गया है। उनका मानना है कि एक देश द्वारा सभी निर्णय लिए जा रहे हैं, जबकि उन्हें वैश्विक स्तर पर समाधान की आवश्यकता है। प्रदर्शनकारी अपने क्षेत्रों में रेगिस्तानीकरण और जल की कमी के कारण होने वाली मौतों से चिंतित हैं और एक ऐसा सम्मेलन चाहते हैं जहां सभी राष्ट्र मिलकर निर्णय ले सकें।