सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने मई के मध्य में एक खुली अदालत की सुनवाई के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं को "टिड्डियां" और "परजीवी" कहा था। इस टिप्पणी ने देश में आक्रोश फैला दिया। इस टिप्पणी को युवाओं के प्रति अनादर के रूप में देखा गया, जो पहले से ही बेरोजगारी की समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई लोगों ने न्यायाधीश के शब्दों की निंदा की और इसे असंवेदनशील बताया। इस घटना ने भारत में न्यायपालिका की भूमिका और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया हुई, और कई लोगों ने न्यायाधीश से माफी की मांग की। यह टिप्पणी भारत में बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं की निराशा को भी उजागर करती है।