मोतीलाल ओसवाल के आशीष शंकर के अनुसार, वैश्विक महंगाई के दबाव के कारण भारत में ब्याज दरों में निकट भविष्य में भारी गिरावट की संभावना नहीं है। सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश में वृद्धि के बावजूद, ब्याज दरों में उल्लेखनीय कमी की उम्मीद कम है। उनका मानना है कि मौजूदा दरें एक निश्चित दायरे में ही रहेंगी। वैश्विक आर्थिक स्थिति और मुद्रास्फीति की दरें भारतीय ब्याज दरों को प्रभावित करेंगी। घरेलू मांग में मजबूती और सरकारी नीतियों का भी इस पर असर पड़ेगा। विशेषज्ञ बताते हैं कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगा और उसके अनुसार निर्णय लेगा। कुल मिलाकर, निकट भविष्य में ब्याज दरों में स्थिरता का अनुमान है।