विदेशी अंशदान विनियमन (FCRA) विधेयक को विपक्ष के तीखे विरोध के बीच संसदीय समिति में भेजा गया है। सरकार ने विधेयक को जॉइंट पार्लियामेंटरी कमेटी (JPC) को भेजने की प्रक्रिया एक वॉइस नोट के माध्यम से पूरी की, जो कि सामान्य प्रक्रिया से अलग है। विपक्ष ने इस कदम की आलोचना करते हुए इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार विधेयक पर बहस से बचने की कोशिश कर रही है। यह विधेयक गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को विदेशी धन प्राप्त करने के नियमों को नियंत्रित करता है। विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक एनजीओ की गतिविधियों पर सरकार के नियंत्रण को बढ़ाएगा और उनकी स्वतंत्रता को सीमित करेगा। इस कदम से नागरिक समाज संगठनों में चिंता पैदा हो गई है। अब JPC विधेयक की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत करेगी।