भारत में दीप्के, जो एक दलित परिवार में पैदा हुए थे, इस वर्ष तब प्रसिद्ध हुए जब सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की बेरोजगार युवाओं को "तितलियों" (cockroaches) से तुलना करने वाली टिप्पणी के जवाब में उनकी छह शब्दों की प्रतिक्रिया ऑनलाइन वायरल हो गई। दीप्के की प्रतिक्रिया ने देश भर में आक्रोश पैदा कर दिया और उन्हें विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया। वे अब मोदी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गए हैं। उनकी कहानी भारत में जाति व्यवस्था और युवाओं की बेरोजगारी जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक समस्याओं पर प्रकाश डालती है। दीप्के का उदय सोशल मीडिया की शक्ति और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की आवाज को बुलंद करने में इसकी भूमिका का भी प्रमाण है। यह घटना भारत में सामाजिक न्याय और राजनीतिक सक्रियता के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम कर रही है। उनकी लोकप्रियता से सरकार पर जवाबदेही के लिए दबाव बढ़ गया है।