भारत ने बांग्लादेश के अनुरोध को दरकिनार करते हुए प्रधानमंत्री शेख हसीना को संबोधित करने का अवसर प्रदान किया। यह घटना जुलाई के सैन्य तख्तापलट की वर्षगांठ पर हुई, जिसे बांग्लादेश द्वारा अपमानजनक माना गया है। बांग्लादेश ने भारत से इस मुद्दे पर संवेदनशीलता बरतने का अनुरोध किया था, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। इस कदम से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत की बांग्लादेश के प्रति नीति में बदलाव का संकेत हो सकता है। इस घटना के बाद बांग्लादेश ने आधिकारिक रूप से भारत के समक्ष विरोध दर्ज कराया है। यह मामला दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।