मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) नागेश्वरन ने रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव को अर्थव्यवस्था के लिए एक स्वाभाविक समायोजन प्रक्रिया बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रुपये के स्तर को किसी निश्चित मनोवैज्ञानिक सीमा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि विनिमय दर एक 'शॉक एब्जॉर्बर' का कार्य करती है, जो बाहरी झटकों को सोखने में मदद करती है। सीईए ने स्पष्ट किया कि रुपये की कमजोरी को लेकर अनावश्यक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह बाजार की ताकतों द्वारा संचालित होती है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत है, जो रुपये को समर्थन देने में सक्षम है। यह बयान रुपये में जारी गिरावट के बीच आया है, जिससे आयात महंगा हो सकता है, लेकिन निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। सरकार का रुख यह दर्शाता है कि वह बाजार संचालित विनिमय दर व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।