सिंगापुर की टेमासेक समर्थित एक कंपनी के पुणे स्थित विकास परियोजना में कथित रिश्वतखोरी के मामले में भारतीय अदालत ने कंपनी के निदेशकों पर लगे प्रतिबंध को बढ़ा दिया है। यह मामला कर्मचारियों को दी गई रिश्वत और उस पर कंपनी की ओर से कोई कार्रवाई न करने से संबंधित है। अदालत ने निदेशकों को परियोजना से संबंधित कोई भी निर्णय लेने या संपत्ति हस्तांतरित करने से रोक दिया है। यह आदेश मामले की आगे जांच के लिए जारी किया गया है। आरोप है कि कंपनी के अधिकारियों को रिश्वत लेने की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित कर दी है, जब मामले में आगे की कार्यवाही होगी। यह मामला भारत में विदेशी निवेश और भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को दर्शाता है।