नागरिकता संशोधन परियोजना (सीजेपी) के सौरव दास ने एक प्रदर्शनकारी के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि आपराधिक मामला चलाने के बजाय मानहानि का मुकदमा बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि विरोध करने का अधिकार नागरिकों का है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। दास ने आगे कहा कि एफआईआर प्रदर्शनकारियों को डराने का प्रयास हो सकता है। उनका मानना है कि मानहानि का मुकदमा अधिक उपयुक्त कानूनी रास्ता होगा यदि प्रदर्शनकारी ने वास्तव में किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि वे मामले को आगे बढ़ाते समय नागरिकों के अधिकारों का ध्यान रखें। इस मामले पर कानूनी विशेषज्ञों का भी ध्यान केंद्रित है क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध के अधिकार से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाता है।