भारत में हाल ही में लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की भारतीय जनता पार्टी द्वारा उद्धृत चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 13 करोड़ नाम सत्यापन प्रक्रिया के दौरान हटाए गए हैं। यह संख्या जापान की जनसंख्या से भी अधिक है। इस कदम से विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, आरोप लगाया है कि यह मतदाताओं को वंचित करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। चुनाव आयोग ने कहा है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अद्यतित करने और डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाने के लिए की गई थी। फिर भी, इस मुद्दे ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, क्योंकि विरोध करने वाले निष्पक्ष और समावेशी चुनाव सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। यह घटना भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही के बारे में चिंताओं को बढ़ाती है।