भारत अब अपनी सीमाओं की निगरानी और सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए घरेलू ड्रोन तकनीक पर महत्वपूर्ण निवेश कर रहा है। दशकों से, भारतीय सेना मुख्य रूप से सैनिकों, लड़ाकू विमानों और उपग्रहों पर निर्भर थी। 2020 में सीमा पर हुई घटनाओं के बाद, ड्रोन की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो गई। सरकार ने ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बनाई हैं और निजी कंपनियों को ड्रोन विकास में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया है। इन ड्रोन का उपयोग निगरानी, टोही और भविष्य में युद्ध में इस्तेमाल के लिए किया जाएगा। भारत का लक्ष्य इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। यह कदम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।