पूर्व जापानी मंत्री ने भारत को बुलेट ट्रेन परियोजना में हो रही देरी के लिए दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि भारत की तरफ से भूमि अधिग्रहण और अन्य ज़रूरी मंजूरी मिलने में विलंब होने के कारण परियोजना पटरी से उतर गई है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जापान की तरफ से कोई बाधा नहीं है और सभी आवश्यक तकनीकी और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। इस परियोजना की शुरुआत 2017 में हुई थी जिसका लक्ष्य 2024 तक मुंबई-अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल सेवा शुरू करना था। लेकिन, देरी के कारण यह लक्ष्य अब मुश्किल दिखाई दे रहा है। इस बयान से भारत और जापान के बीच के संबंधों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि यह परियोजना दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी का प्रतीक थी। अब देखना होगा कि भारत सरकार इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देती है और परियोजना को गति देने के लिए क्या कदम उठाती है।