अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने भारत में मतदाताओं की सूची से हटाए गए 13 करोड़ मतदाताओं के डेटा का विश्लेषण किया। इस विश्लेषण के दौरान, उन्होंने 70 लाख ऐसे बदलावों की पहचान की जो अस्पष्ट और बिना किसी स्पष्टीकरण के थे। भल्ला ने मतदाताओं की सूची में हेरफेर की संभावना जताई है और इस मामले में गहन जांच की मांग की है। उनका मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं को हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इस खोज से चुनाव आयोग पर मतदाताओं की सूची को अपडेट करने और पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। भल्ला के विश्लेषण ने भारत की चुनावी प्रक्रिया में डेटा की अखंडता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। यह मामला भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।