2003-04 में, लेखिका अपने मित्र तानिया के घर, अखौरा गईं थीं, जहाँ उन्होंने पहली बार भारत-बांग्लादेश सीमा और विवादास्पद कांटेदार तारों की बाड़ देखी थी। बाड़ दोहरी परत वाली, मोटी और मजबूत थी, जिससे जानवरों के लिए भी पार करना मुश्किल था। लेखिका ने 2023 में अपने बेटे को दार्जिलिंग के एक स्कूल में दाखिला दिलाया और उस वर्ष लगभग हर महीने बेटे के साथ वहां गईं। यह यात्रा सीमावर्ती क्षेत्रों के बारे में उनके अनुभवों और विचारों को दर्शाती है। लेख में 'पुशइन' रणनीति के बारे में भी चर्चा की जा रही है, जिसका उद्देश्य संभवतः बांग्लादेश पर दबाव बनाए रखना है। हालांकि, लेख का मुख्य फोकस सीमा क्षेत्र का व्यक्तिगत अवलोकन और अनुभव है। यह घटनाक्रम सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।