आने वाली सरकार को फ़्रैकिंग पर प्रतिबंध लगाने की पहल विरासत में मिलेगी। 2022 से फ़्रैकिंग के पायलट कार्यक्रम निलंबित हैं, जिससे इस पर आगे निर्णय लेना महत्वपूर्ण हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि फ़्रैकिंग से तेल और गैस के भंडारों को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। सरकार को अब यह तय करना होगा कि क्या वह इन भंडारों का दोहन करेगी या प्रतिबंध जारी रखेगी। इस मुद्दे पर पर्यावरणीय चिंताएं और आर्थिक अवसर दोनों जुड़े हुए हैं। फ़्रैकिंग पर निर्णय लेने से न केवल ऊर्जा नीति प्रभावित होगी, बल्कि देश के आर्थिक भविष्य पर भी असर पड़ेगा। सरकार को सभी पहलुओं पर सावधानीपूर्वक विचार करना होगा।