आइसलैंड में यूरोपीय संघ (EU) की सदस्यता के लिए फिर से बातचीत शुरू करने पर जनमत संग्रह हो रहा है। 2013 में इन वार्ताओं को रोक दिया गया था, और अब यह तय होना है कि उन्हें फिर से शुरू किया जाएगा या नहीं। हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, EU में शामिल होने के समर्थकों और विरोधियों के बीच कड़ी टक्कर है, और दोनों पक्ष लगभग समान स्थिति में हैं। यह जनमत संग्रह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आइसलैंड की विदेश नीति की दिशा तय करेगा। यदि बहुमत EU में शामिल होने के पक्ष में मतदान करता है, तो आइसलैंड औपचारिक रूप से सदस्यता के लिए बातचीत शुरू कर सकता है। वहीं, विरोधियों का तर्क है कि EU की सदस्यता आइसलैंड की संप्रभुता को कमज़ोर करेगी और मत्स्य पालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी। इस जनमत संग्रह के परिणाम का पूरे यूरोप पर असर पड़ सकता है।