आइसलैंड के नागरिकों ने यूरोपीय संघ के साथ संभावित सदस्यता पर जनमत संग्रह में ‘नहीं’ का फैसला किया है। इस परिणाम के साथ, कम से कम 2028 तक इस मुद्दे पर कोई नई बातचीत नहीं होगी। प्रधानमंत्री ने मतदान में उच्च भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया है और सभी के विचारों का सम्मान करने की बात कही है। यूरोपीय आयोग ने आइसलैंड को अपना करीबी सहयोगी बताते हुए, इस फैसले को स्वीकार किया है। यह जनमत संग्रह आइसलैंड की यूरोपीय संघ में शामिल होने की लंबे समय से चली आ रही बहस को दर्शाता है। देश की जनता की इच्छा स्पष्ट है कि फिलहाल यूरोपीय संघ की सदस्यता नहीं चाहिए। अब सरकार का ध्यान अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित होगा।

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