आइसलैंड ने यूरोपीय संघ की पूर्ण सदस्यता की राह पर लौटने से इनकार कर दिया है, जिससे यूरोपीय संघ के लिए आर्कटिक क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की योजना को झटका लगा है। यह निर्णय यूरोपीय संघ के लिए एक महत्वपूर्ण विफलता है क्योंकि आर्कटिक क्षेत्र भू-राजनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। आइसलैंड पहले ही यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र का सदस्य है, जो उसे यूरोपीय संघ के बाजार तक पहुंच प्रदान करता है, लेकिन पूर्ण सदस्यता के लिए आवश्यक राजनीतिक और कानूनी दायित्वों को वह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। इस इनकार के पीछे आइसलैंड की संप्रभुता बनाए रखने और अपनी मत्स्य पालन नीतियों को स्वतंत्र रूप से निर्धारित करने की इच्छा है। यूरोपीय संघ अब आर्कटिक क्षेत्र में अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर हो सकता है, जिसमें अन्य देशों के साथ सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि यूरोपीय संघ की सदस्यता हमेशा एक सरल प्रक्रिया नहीं होती है, और देशों की अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताएं होती हैं।