आइसलैंड में यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने की वार्ता को फिर से शुरू करने के विरोधियों ने मतगणना के अंतिम चरण में मामूली बढ़त हासिल कर ली है। शुरुआती रुझानों से पता चलता है कि देश की जनता यूरोपीय संघ की सदस्यता की ओर लौटने के लिए उत्सुक नहीं है। यह परिणाम आइसलैंड के राजनीतिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि EU सदस्यता का मुद्दा लंबे समय से बहस का विषय रहा है। वोटों की गिनती अभी भी जारी है, और अंतिम परिणाम में बदलाव संभव है। हालांकि, वर्तमान स्थिति यूरोपीय संघ की सदस्यता के पक्ष में किसी भी संभावित बदलाव को कम दर्शाती है। यह विरोध 2008 के आर्थिक संकट के बाद शुरू हुआ था, जब आइसलैंड ने EU में शामिल होने के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में 2015 में वार्ता को निलंबित कर दिया गया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतिम परिणाम आइसलैंड और यूरोपीय संघ के बीच भविष्य के संबंधों को कैसे प्रभावित करेगा।