हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने एक ऐसे शिक्षाविद को भ्रष्टाचार विरोधी कार्यालय का प्रमुख नियुक्त किया है जिसके पास कानून की डिग्री नहीं है। इस नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि आलोचकों का कहना है कि भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए कानूनी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण है। नए प्रमुख, इस्तवान टोरोत्स्की, सरकारी भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए एक नई रणनीति विकसित करने का काम करेंगे। उनका चयन योग्यता के बजाय राजनीतिक वफादारी के आधार पर किया गया है, ऐसा माना जा रहा है। इस नियुक्ति से भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है, इसे "मजाकिया" और "भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का अपमान" बताया है।

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