सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में एमसीसी में धन डाला, जैसे कि वह पूरे उच्च शिक्षा बजट को यहीं खर्च करना चाहती हो। हालांकि, शुक्रवार, 31 जुलाई को, टिज़ा सरकार के निर्णय के अनुसार, संगठन को चलाने वाले फाउंडेशन को भंग कर दिया गया। अब इस फाउंडेशन में मौजूद संपत्ति का क्या होगा, यह सवाल उठ रहा है। एमसीसी में भारी मात्रा में सरकारी धन का निवेश किया गया था, इसलिए इसकी संपत्ति का भविष्य महत्वपूर्ण है। मोल, रिचर, लिबरी और मैंडिनर जैसी कंपनियों की संपत्ति भी इससे जुड़ी हुई है। यह फैसला इन कंपनियों के स्वामित्व और संचालन पर असर डाल सकता है। संपत्ति के वितरण पर जल्द ही निर्णय लिया जा सकता है। यह स्थिति हंगरी के शैक्षणिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।