हंगेरी में कंपनियों के लिए आसान शर्तों पर मिलने वाले ऋणों का दौर समाप्त होने की कगार पर है। पिछले डेढ़ दशक से चल रही इस व्यवस्था के तहत कंपनियों को कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था, जो मूल रूप से आर्थिक संकट से निपटने के लिए शुरू की गई थी, लंबे समय में कंपनियों को आलसी बना सकती है। इसके अतिरिक्त, सरकार को इस व्यवस्था के कारण भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है, जिसका आंकड़ा अरबों फॉरिंट में है। अब कंपनियों को ऋण प्राप्त करने के लिए अधिक प्रयास करने होंगे और उच्च ब्याज दरों का सामना करना पड़ेगा। यह बदलाव हंगेरी की अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। सरकार अब इस नीति को बदलने पर विचार कर रही है।