हंगरी में इस वर्ष के वित्तीय घाटे के अनुमान से अधिक होने के कारण यूरो अपनाने की उम्मीदों को आंशिक रूप से झटका लगा है। हालाँकि, बाजार में यूरो को लेकर जो उत्साह था, वह कुछ हद तक कम हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक परिदृश्य में, नई सरकार के बजट ही महत्वपूर्ण होंगे। वर्तमान घाटा तात्कालिक चिंता का विषय है, लेकिन भविष्य की वित्तीय नीतियां यूरो क्षेत्र में शामिल होने की संभावना को अधिक प्रभावित करेंगी। सरकार की राजकोषीय नीतियों पर निवेशकों की नजर रहेगी। यह स्थिति यूरो अपनाने की समय-सीमा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा सकती है। कुल मिलाकर, घाटे ने यूरो अपनाने की राह को थोड़ा कठिन बना दिया है।

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