1526 में मोहाच की लड़ाई हंगरी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी, जो मात्र दो घंटे से भी कम समय में समाप्त हो गई। इस लड़ाई में उतरी हुई हंगरी की सेना की पराजय ने तुर्कों को भी आश्चर्यचकित कर दिया था। इतिहासविदों का मानना है कि एक कमजोर शासक, आंतरिक कलह और वित्तीय संकट ने हंगरी की हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लड़ाई के बाद, तुर्क सेना ने पूरी रात और अगले दिन तक युद्धक्षेत्र में ही डेरा डाला, यह सोचकर कि कहीं वास्तविक हंगरी की सेना हमला न कर दे। यह हार हंगरी के लिए विनाशकारी साबित हुई और इसने देश के भविष्य को बदल दिया। यह घटना हंगरी के इतिहास में एक गहरे संकट की शुरुआत थी।