हंगरी में प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन, जिसमें १२ वर्ष से कम उम्र के सांसदों की भागीदारी को सीमित किया गया है, पर कानूनी विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है। TASZ नामक एक संगठन का मानना है कि इस संशोधन को लागू करने में जल्दबाजी की जा रही है। उनका तर्क है कि केवल पांच दिनों के परामर्श के दौरान सार्थक सामाजिक बहस संभव नहीं है। यह संशोधन, यदि लागू होता है, तो युवा पीढ़ी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है। TASZ ने इस मुद्दे पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण बदलावों पर गहन विचार-विमर्श आवश्यक है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधन प्रक्रिया में पारदर्शिता और समावेशिता महत्वपूर्ण है।
