सरकार छात्रों के वेतन का 75 से 100 प्रतिशत तक वहन करने पर विचार कर रही है। इस कदम का उद्देश्य छात्रों के बीच रोजगार को बढ़ावा देना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब्सिडी उन नौकरियों पर भी खर्च हो सकती है जो बिना सरकारी सहायता के भी उपलब्ध होतीं। इस नीति से रोजगार में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित करने की चिंताएं उठ रही हैं। सरकार का तर्क है कि इससे छात्रों को कार्य अनुभव प्राप्त करने और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने में मदद मिलेगी। आलोचकों का कहना है कि यह करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग हो सकता है। इस योजना के दीर्घकालिक प्रभावों का मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण होगा। यह देखना बाकी है कि यह पहल छात्रों के रोजगार को बढ़ाने में कितनी सफल साबित होती है।
