1956 में हंगरी की क्रांति के प्रभाव को लेकर नए KGB दस्तावेज़ सामने आए हैं। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि सोवियत संघ में इस क्रांति से डर और गिरफ्तारियां हुईं थीं। हंगरी की घटनाओं ने सोवियत संघ के भीतर आश्चर्यजनक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कीं। KGB फ़ाइलें सोवियत अधिकारियों की चिंता को दर्शाती हैं, क्योंकि उन्हें डर था कि हंगरी में विद्रोह फैल सकता है। गिरफ्तारियों से पता चलता है कि सोवियत शासन ने किसी भी असंतोष को दबाने की कोशिश की। यह खुलासा हंगरी की क्रांति के सोवियत संघ पर पड़े गहरे प्रभाव को उजागर करता है। दस्तावेजों से उन कहानियों का भी पता चलता है जो पहले कभी सार्वजनिक नहीं हुई थीं।