हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने यूरोपीय संघ की शिखर वार्ता में अपना पहला संबोधन दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका लक्ष्य ब्रुसेल्स में लोकप्रिय बनना नहीं, बल्कि अपने देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। उनके भाषण में अवैध प्रवासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वकालत की गई। उल्लेखनीय है कि मग्यार के इस रुख को अन्य यूरोपीय नेताओं से अप्रत्याशित सराहना मिली और सभागार में तालियाँ बजीं। प्रधानमंत्री मग्यार ने अपने संबोधन में ईमानदारी पर जोर दिया और यूरोपीय संघ के भीतर हंगरी के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से रखा। यह संबोधन हंगरी की विदेश नीति में एक नए दृष्टिकोण का संकेत देता है, जो राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। यह घटना यूरोपीय संघ के भीतर हंगरी की भूमिका और भविष्य की दिशा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
