यूरोपीय संघ के प्रस्तावित शरणार्थी समझौते को लेकर हंगरी में राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। सभी दल इस समझौते का विरोध कर रहे हैं, और सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह वर्तमान रूप में इसे लागू नहीं करेगी। हंगरी का मानना है कि यूरोपीय संघ के भीतर कई अन्य देश भी इस समझौते से संतुष्ट नहीं हैं, भले ही इसमें कई कठोर प्रावधान शामिल हों। सरकार इस समझौते के कारण प्रतिदिन खोने वाले एक मिलियन यूरो के नुकसान पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। यह समझौता हंगरी के लिए वित्तीय और राजनीतिक दोनों तरह से महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विरोध आगामी यूरोपीय चुनावों से पहले मतदाताओं को आकर्षित करने का एक प्रयास भी हो सकता है। हंगरी सरकार इस मुद्दे पर अन्य यूरोपीय देशों के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रही है।