अगायला किनज़ब्रुनर के अनुसार, मार्क ट्वेन ने एक प्रसिद्ध वाक्यांश को लोकप्रिय बनाया, जिसके कई संभावित निर्माता हैं, जिनमें ब्रिटिश प्रधान मंत्री बेंजामिन डिजरायली भी शामिल हैं: "झूठ होते हैं, शापित झूठ होते हैं, और सांख्यिकी होती है"। यह कथन इस बात पर प्रकाश डालता है कि सांख्यिकी को कैसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है या हेरफेर किया जा सकता है। लेख में इस बात पर विस्तार से चर्चा की गई है कि कैसे आंकड़ों का उपयोग वास्तविकता को छिपाने या गलत धारणाएं बनाने के लिए किया जा सकता है। यह लेख, जो *TalCual* पर प्रकाशित हुआ है, तथ्यों की जटिलता और उनकी व्याख्या के महत्व पर जोर देता है। यह मानवीय स्थिति और सच्चाई की हमारी समझ में सांख्यिकी की भूमिका की पड़ताल करता है। डिजरायली के इस कथन से यह संकेत मिलता है कि सांख्यिकी, अपने आप में, हमेशा विश्वसनीय नहीं होती है और सावधानीपूर्वक विश्लेषण की आवश्यकता होती है। यह पाठकों को जानकारी का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने के लिए प्रोत्साहित करता है।