जर्मनी के श्लेस्विग-होल्स्टीन राज्य ने अंतिम संस्कार के लिए 'ह्यूमन कंपोस्टिंग' नामक एक नई विधि को कानूनी मान्यता दे दी है। यह कदम यूरोपीय देशों में अंतिम संस्कार के कानूनों में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। अब यहाँ के नागरिक पारंपरिक दफन या शवदाह के अलावा इस तीसरे और पूरी तरह से पारिस्थितिक विकल्प को चुन सकते हैं। इस पद्धति का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है। यह विधि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाते हुए शरीर को मिट्टी में बदलने की प्रक्रिया पर आधारित है। इस कानूनी बदलाव से अब पर्यावरण के अनुकूल अंतिम विदाई के रास्ते खुल गए हैं। यह कदम भविष्य में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।