होंडा ने महसूस किया है कि सुपर वन के लॉन्च होने के साथ ही, पहला सवाल प्रदर्शन या बैटरी का नहीं, बल्कि कीमत का होगा। कंपनी जानती है कि ग्राहकों की दिलचस्पी सबसे पहले यह जानने में है कि यह स्कूटर उनकी जेब पर कितना भार डालेगा। होंडा का मानना है कि सुपर वन महंगा नहीं है, लेकिन इसके मूल्य का निर्धारण करने का तरीका अलग है। यह पारंपरिक स्कूटरों से अलग तरीके से मूल्यांकित किया जाएगा, संभवतः स्वामित्व की कुल लागत पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा। होंडा इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि सुपर वन की वास्तविक कीमत इसके दीर्घकालिक लाभों और कम रखरखाव खर्चों में छिपी है। कंपनी का उद्देश्य ग्राहकों को यह समझाना है कि सुपर वन एक किफायती विकल्प है, भले ही प्रारंभिक लागत थोड़ी अधिक हो। यह रणनीति इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में होंडा की स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकती है।