कोलंबिया में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ पहली बार देश के संविधान द्वारा धर्मनिरपेक्ष घोषित होने के बावजूद एक सार्वजनिक प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इस सभा में एक रब्बी, एक पादरी और एक पास्टर ने भाग लिया, लेकिन राष्ट्रपति इस अवसर पर मौजूद नहीं थे। ‘आवाहन और स्तुति’ नामक इस कार्यक्रम ने कोलंबिया के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। यह घटना देश में धर्म और राज्य के संबंधों पर बहस को जन्म दे सकती है। इस सभा का आयोजन 'ला सील्ला वाकिया' नामक संगठन द्वारा किया गया था। यह घटना कोलंबिया के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के भीतर धार्मिक अभिव्यक्ति की सीमाओं के बारे में सवाल उठाती है। इस प्रकार का आयोजन भविष्य में धार्मिक सहिष्णुता और संवाद को बढ़ावा दे सकता है।