सर्वोच्च न्यायालय ने एक स्कूल में बलात्कार के दोषी को दी गई फांसी की सजा को कम करके आजीवन कारावास में बदल दिया है। यह मामला एक स्कूली छात्रा के साथ बलात्कार और हत्या से जुड़ा है, जिसने पहले निचली अदालत में दोषी को मौत की सजा सुनाई थी। न्यायालय ने सजा कम करते समय दोषी की उम्र और मामले की परिस्थितियों पर विचार किया। अदालत ने माना कि यह मामला दुर्लभतम श्रेणी का नहीं है जिसमें मौत की सजा उचित हो। इस फैसले से पीड़िता के परिवार में निराशा है, जबकि दोषी के वकील ने फैसले का स्वागत किया है। यह फैसला भारतीय दंड प्रणाली में सजा की गंभीरता पर बहस को फिर से जन्म देगा। मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।