ग्रीष्म लहरें हृदय, गुर्दे और मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों के लिए एक मौन खतरा हैं। ये मरीज़ विशेष रूप से गर्मी के प्रति संवेदनशील होते हैं, क्योंकि तापमान बढ़ने से उनकी स्थितियाँ और भी गंभीर हो सकती हैं। चिकित्सकों को इन रोगियों की उपचार योजनाओं को समायोजित करने और बनाए रखने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी, दवाइयों का प्रभाव बदलना, और अन्य जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। स्वास्थ्य पेशेवरों का कहना है कि इन मरीज़ों को गर्मी से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें हाइड्रेटेड रहने, ठंडी जगह पर रहने और अपने डॉक्टर के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है। इस अवधि में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग भी बढ़ जाती है, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

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