यूरोप में अभूतपूर्व गर्मी के कारण सोयाबीन की फसल में भारी गिरावट आई है, जिससे पशुधन के लिए महत्वपूर्ण प्रोटीन स्रोत की कमी हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, फसल की पैदावार में 70 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। इस कमी के कारण, यूरोप को अब सोयाबीन और सोयाबीन के तेल जैसे उत्पादों के लिए आयात पर अधिक निर्भर रहना पड़ेगा। यह आयात अक्सर उन देशों से किया जाता है जो अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वनों की कटाई करते हैं, विशेष रूप से वर्षावनों की। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति खाद्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इससे पशुधन किसानों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि उन्हें अधिक महंगे दामों पर चारा खरीदना पड़ेगा। इस स्थिति से निपटने के लिए, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और स्थानीय प्रोटीन स्रोतों को बढ़ावा देना आवश्यक है।