हवाई के वैज्ञानिकों ने ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में प्रकाशित एक शोध में पता लगाया है कि एयर कंडीशनिंग की मांग को मापने वाला वैश्विक उपकरण त्रुटिपूर्ण है। यह उपकरण नमी को ध्यान में नहीं रखता, जिससे कूलिंग सिस्टम की दक्षता में गिरावट को कम करके आंका जाता है। शोध के अनुसार, 1971 से हर दशक में कूलिंग सिस्टम की दक्षता में 2% से 4% की कमी आई है, जो पारंपरिक मापदंडों से अदृश्य है। नमी के प्रभाव को नजरअंदाज करने से कूलिंग दक्षता का गलत आकलन होता है, जो जलवायु परिवर्तन के अनुमानों को प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस त्रुटि को सुधारा जाना चाहिए ताकि कूलिंग की वास्तविक मांग और ऊर्जा खपत को सटीक रूप से मापा जा सके। यह खोज अधिक प्रभावी और टिकाऊ कूलिंग समाधान विकसित करने में मदद कर सकती है।

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