हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि बच्चों पर कठोर अनुशासन का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। शारीरिक दंड, जिसे अक्सर प्यार के रूप में उचित ठहराया जाता है, बच्चों के मस्तिष्क के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कठोर अनुशासन से बच्चों में भावनात्मक नियंत्रण की कमी, सीखने की क्षमता में गिरावट, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और आक्रामक व्यवहार जैसे चार प्रमुख दुष्प्रभाव हो सकते हैं। यह बच्चों के संज्ञानात्मक विकास और सामाजिक-भावनात्मक कल्याण को बाधित कर सकता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सकारात्मक सुदृढीकरण और संवाद के माध्यम से बच्चों का मार्गदर्शन करना अधिक प्रभावी है। इस तरह के सकारात्मक दृष्टिकोण बच्चों में आत्मविश्वास और आत्म-अनुशासन को बढ़ावा देते हैं।