यदि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि पूरे वर्ष जारी रहती है, तो कोई भी सब्सिडी या सरकारी खजाना इसे सहन नहीं कर पाएगा। यह स्थिति नागरिकों पर गंभीर आर्थिक दबाव डालेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती कीमतों के कारण सरकार के लिए सब्सिडी प्रदान करना मुश्किल हो जाएगा। सार्वजनिक वित्त पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे आर्थिक स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। इस स्थिति से निपटने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय करने की आवश्यकता है। सरकार को राजस्व बढ़ाने और खर्चों को कम करने के लिए कदम उठाने होंगे। अन्यथा, आर्थिक संकट गहराता जाएगा और नागरिकों को और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। यह स्थिति विशेष रूप से कमजोर वर्गों के लिए चुनौतीपूर्ण होगी।