इक्कीसवीं सदी में हैती में आए भूकंप सबसे घातक साबित हुआ, जिसमें तीन लाख लोगों की जान गई। इस भूकंप ने हैती में व्यापक तबाही मचाई, जिससे दो लाख पचास हजार से अधिक इमारतें नष्ट हो गईं। यह भूकंप सदी के सबसे भीषण भूकंपों में से एक था, जिसने देश को भारी क्षति पहुंचाई। हैती की सरकार और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने राहत और पुनर्निर्माण के प्रयास किए, लेकिन पुनर्निर्माण की प्रक्रिया धीमी रही। भूकंप के कारण हैती की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान हुआ। इस त्रासदी ने भूकंप से प्रभावित देशों में आपदा प्रबंधन और तैयारी के महत्व को उजागर किया। हैती में यह भूकंप एक राष्ट्रीय त्रासदी के रूप में याद किया जाता है।
