जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान, डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में निवेश के लिए धन मुहैया कराने हेतु संयुक्त अरब अमीरात, कतर और मिस्र के नेताओं को आमंत्रित किया। ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रम्प, ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद, अब अरब देशों से ही वहां निवेश के लिए आर्थिक सहायता की अपेक्षा कर रहे हैं। इन अरब सहयोगियों को ईरान के साथ जल्दबाजी में किए जा रहे समझौते को लेकर चिंता है। उनका मानना है कि यह समझौता बिना सोचे-समझे किया जा रहा है। इन देशों ने पहले ही ईरान के खिलाफ युद्ध में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अब उन्हें लगता है कि इस समझौते से उनकी भूमिका कमज़ोर हो सकती है। इस बैठक का उद्देश्य ईरान में संभावित निवेश पर अरब देशों का समर्थन हासिल करना था। यह कदम ईरान के साथ संबंधों को लेकर क्षेत्रीय तनाव को भी दर्शाता है।
