खाड़ी देशों को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान परमाणु समझौते से संभावित नकारात्मक परिणामों की आशंका है। इन देशों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा इस समझौते से हटने का कदम क्षेत्र में अस्थिरता ला सकता है। ये देश अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं और उन्हें डर है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण खोने से सुरक्षा चुनौतियां बढ़ जाएंगी। ट्रंप प्रशासन ने 2018 में इस समझौते से हटने का फैसला किया था, जिसे पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में किया गया था। खाड़ी देशों का मानना है कि इस फैसले से ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने का अवसर मिल सकता है। इस स्थिति से क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वर्तमान में, इस मुद्दे पर खाड़ी देशों और अमेरिका के बीच गहन विचार-विमर्श चल रहा है।
